उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, गोमती, घाघरा, सरयू, राप्ती और अनेक स्थानीय नदियां जनजीवन, खेती, जल उपलब्धता और जैव विविधता का आधार हैं। नदी तटों की हरियाली, खुले जलग्रहण क्षेत्र और स्थानीय वन पट्टियां जल और मिट्टी की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अवैध कटाई, तटों पर कचरा, सीवेज, निर्माण मलबा, अतिक्रमण और खुले में कचरा जलाना नदी और शहरी हरित क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। जब जल निकासी और प्राकृतिक ढलान बाधित होते हैं, तो बारिश का पानी जमीन में कम उतरता है और जलभराव, प्रदूषण तथा भूजल दबाव बढ़ता है।
नदी और हरित क्षेत्र संरक्षण के लिए नागरिक निगरानी बहुत जरूरी है। अवैध कटाई, मलबा डंपिंग, आग, प्लास्टिक कचरा और जल निकासी अवरोध जैसी गतिविधियों की समय पर सूचना स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण समूहों तक पहुंचनी चाहिए।
स्थानीय पौधों का रोपण, नदी तटों की सफाई, जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा, पार्कों की देखभाल और सामुदायिक जागरूकता उत्तर प्रदेश के पर्यावरण को मजबूत बनाने के व्यावहारिक कदम हैं।


